Wednesday, December 16, 2020

अजी सुनते हो सरकार !

 


हम समझ रहें है, आप कब समझेंगे
सियासत के शोर में हमारी नहीं सुनेंगे?
हम किसान है अपना हक नहीं छोड़ेंगे
कानून बदलवाना जिद है इसे नहीं छोड़ेंगे

तुम्हारे हृदय! गर अब भी न पसींजेंगे
तो, देखना तुम!अबकी आंसू उपजेंगे

क्योंकि,
माथे पर चिंता की लकीरें लेकर
धूप में बदन को सुखाया भी हम सबके वास्ते
आज उस अन्नदाता के लिए
बंद हैं! संसद के रास्ते

उनके मुद्दे पर भी अभी तक
बातचीत से हल नहीं निकला
जिनके हल सुबह से निकलकर
शाम की बातचीत के वक़्त
खेत से वापस घर आते हैं





























1 comment:

अजी सुनते हो सरकार !

  हम समझ रहें है, आप कब समझेंगे सियासत के शोर में हमारी नहीं सुनेंगे? हम किसान है अपना हक नहीं छोड़ेंगे कानून बदलवाना जिद है इसे नहीं छ...