Monday, September 14, 2020

खुद पेंशन के बूते खा रहें हैं!...

               


जुमलों की बनी है माला

हर तरह हो रही है गड़बड़

हर तरफ हो रहा घोटाला

जेब में एडिटर साहेब हैं

और मनमर्जी काहे न हो

जब खुद के दफ्तर से

अख़बार जा रहा है निकाला!


आलम तो देखिए जनाब...


सरकारों से सरकारी विभाग

अब नहीं जा रहा है संभाला!



तब...

देशभक्ति की भावना

सरकार जगाने आई है

युवाओं के भविष्य के 

सौदे का मसौदा लाई है.


कर्तव्य पथ पर कर्तव्य से 

मुंह मोड़ रही है सरकार

बेरोजगारों को किस दोराहे 

पर छोंड रही है सरकार.


देशभक्ति के संग दिया

नैतिकता बढ़ाने का हवाला

फिर चुपके से छीन लिया

मुंह को आ रहा निवाला!


खुद का दामन मैला हैं

ये दाग छुड़ाने आएं है

खुद पेंशन के बूते खा रहें हैं

अब नौकरी खाने आएं हैं.


वादों की झड़ी लगाने वाले

रोजी का व्यापार करेंगे!

नाव में करके बैठे हैं छेद

22 की वैतरणी क्या फिर से

राम भरोसे ही पार करेंगे!


लेकिन...

सरकार सुन लेे कान खोलकर

निजीकरण की दुकान खोलकर!


भाषणों का शिकार युवा भी तैयार है

सोशल साइट्स से लेकर हर मोर्चे पर

विरोध है और परिवर्तन की बयार है

अबकी बार रोड पर सीधा आर पार है.




































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